संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस के रूप में मनाने का आह्वान

नई दिल्लीः तीन किसान संगठनों-अखिल भारतीय किसान सभा (अजय भवन), अखिल भारतीय किसान सभा (शुक्ल मार्ग), आल इंडिया किसान महासभा-की 17 मई को एक आनलाइन मीटिंग हुई। इसमें देश में कोविड की गंभीर स्थिति, किसान संघर्ष की वर्तमान स्थिति और इन चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक मजबूत वामपंथी एकता की जरूरत पर विचार-विमर्श किया गया।

मीटिंग में तीनों संगठनों द्वारा कोविड-19 से प्रभावित परिवारों और लोगों की हर संभव मदद करने के अपने प्रयासों को और अधिक मजबूत करने पर विचार किया गया। कोविड महामारी इस बार गांवों में पहुंच गई है जहां न अस्पताल हैं और न ही सरकार की तरफ से महामारी से गांवों को बचाने के कोई गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।

हमारी मांग है कि केन्द्र और राज्य सरकारें बिना देर किए गांवों में लोगों को कोविड की बीमारी से बचाने, इलाज मुहैया कराने, गांवों में टीकाकरण को रफ्तार देने और अन्य राहत कदम उठाने की दिशा में यु( स्तर पर काम करें। कोरोना की दूसरी लहर के समान केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा जिस तरह की आपराधिक लापरवाही बरती जा रही है, उसका पर्दाफाश किया जाना जरूरी है। सरकार की वैक्सीन नीति कार्पोरेट परस्त और जनविरोधी है। गांवों में टीकाकरण का काम बेहद सुस्त तरीके से चल रहा है। व्यवहारतः गांवों में टीकाकरण अभी तक नाममात्र का ही हुआ है।

मीटिंग में तय किया गया कि संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को काला दिवस के रूप में मनाने के आह्वान पर सभी किसान संगठन अपनी पूरी ताकत से इस आह्वान को सफल बनाएं। तीनों किसान संगठन इसके लिए अन्य किसान संगठनों से तालमेल बनाकर 26 मई को राष्ट्रीय स्तर पर कालादिवस के रूप में मनाएंगे। मीटिंग में यह भी तय किया गया कि तीनों संगठनों के बीच काॅआर्डिनेशन बढ़ाया जाएगा और इसके लिए नियमित तौर पर आॅनलाइन मीटिंगें की जायेगी।

आनलाईन मीटिंग में अखिल भारतीया सभा (अजय भवन) के महासचिव अतुल कुमार अनजान, अखिल भारतीय किसान सभा (शुक्ल मार्ग) के महासचिव हन्नान मौला और अखिल भारतीय किसान महासभा के राजाराम सिंह ने हिस्सा लिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 26 मई को काला दिवस मनाने के संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले का स्वागत किया और अपनी सभी इकाईयों का आह्वान किया है कि वह इस कार्यक्रम में सक्रिय होकर हिस्सा लें।

देश के दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों ने भी 26 मई को काला दिवस के रूप में मनाने के फैसले का स्वागत किया है। देश की ट्रेड यूनियनें किसान संगठनों के साथ मिलकर 26 मई को देश भर में काला दिवस के रूप में मनायेंगी।

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