वामपंथी एवं जनवादी शक्तियों के साथ मिलकर व्यापक एवं जोरदार आंदोलन चलायेंगे

पानीपत , 15 फरवरी । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की हरियाणा राज्य कौंसिल की दो दिवसीय मिटिंग स्थानीय भगत सिंह स्मारक सभागार में आयोजित की गई। कल शुरु हुई बैठक में सर्वप्रथम पुलवामा में सी आर पी एफ के शहीदों को नमन किया गया और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

बैठक में पिछले 80 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान मृत्यु प्राप्त करने वाले किसानों, उत्तराखंड में ग्लेशियर के कारण आई तबाही में जान गवाने वाले नागरिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बैठक की अध्यक्षता कामरेड राम रतन सैनी एडवोकेट ने की और सी पी आई के राज्य सचिव दरियाव सिंह कश्यप ने हरियाणा के वर्तमान हालात पर विस्तरित रिपोर्ट पेश की । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय सचिव कामरेड अमरजीत कोर ने आज बैठक का समापन किया।


कोरोना महामारी के चलते एक साल बाद सी पी आई की हरियाणा राज्य कौंसिल की बैठक को सम्बोधित करते हुए कामरेड अमरजीत कौर ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे किसानों के साथ केन्द्र की मोदी सरकार दुश्मनों जैसा व्यवहार का रही है। उन्होंने कहा कि सिंघु, टीकरी और गाजीपुर बार्डर पर दिल्ली पुलिस द्वारा बडे़ बडे़ बैरीकेट लगाए गये, सड़कें खोद दी गई यहां तक कि गाजीपुर बार्डर पर तो बैरीकेट, कंटीले तार की बाड़ के साथ साथ सड़क पर नुकीली कीलें तक लगाई गई।

उन्होने कहा कि सरकार किसानों को दिल्ली में जाने से रोकने के लिए ऐसे प्रबंध कर रही है ऐसे तो दुश्मनों को रोकने के लिए भी नही किये जाते। कामरेड अमरजीत कौर ने कहा कि पिछली सरकारों से कानून बनवाने के लिए बडे़ बडे़ आंदोलन करने पड़ते थे, कुर्बानियां देनी पड़ती थी जब कहीं जाकर कोई कानून बन पाता था।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बिना नोटबंदी की मांग पर नोटबंदी की, किसी व्यापारी संगठन ने जी एस टी की मांग नही की लेकिन इस सरकार ने जी एस टी लागु की, किसी भी श्रमिक संगठन ने 44 श्रम कानूनों को तोड़ने की मांग नही की लेकिन सरकार अनेक बलिदानों के बाद प्राप्त किये गये 44 श्रम कानूनों को तोड़ कर 4 लेबर कोड लेकर आई।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एक भी किसान या किसी किसान संगठन ने नये कृषि कानून बनाने की मांग नही की लेकिन यह सरकार किसान, कृषि और आमजन विरोधी कानून लेकर आई।
केन्द्रीय बज़ट की चर्चा करते हुए कामरेड अमरजीत कौर ने कहा कि यह बज़ट कारपोरेट जगत और बडे़ बडे़ औधोगिक घरानों के लिए है।

इसमें गरीबों, किसानों, छोटे व मध्यमवर्गीय तबकों के लिए कुछ नहीं है। बज़ट में कृषि, बीमा क्षेत्र सहित हर क्षेत्र को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ डी आई) के लिए खौल दिया गया। उन्होंने सीपीआई के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आहवान किया कि इस सरकार की जनविरोधी, देशविरोधी नीतियों के खिलाफ चल रहे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका अदा करें।


बैठक में तिलक राज विनायक, सत्येन्द्र गिरी, सतपाल सिहँ बैनीवाल, बेचू गिरि, धर्म पाल सिहँ चौहान, एम सी बासिया,अश्विनी कुमार, रुप सिहँ, मुरली कुमार, आर एन सिंह पवन कुमार सैनी, बीर भान जांगडा़, जगरुप सिहँ, गुरभजन सिंह, मामचंद सैनी, पूनम चौहान, हरभजन सिंह सन्धु, ईश्म सिंह, बीर सिहँ आदि ने विचार प्रकट किये।

विचार विमर्श के बाद कृषि कानूनों एवं 4 लेबर कोड के खिलाफ आंदोलन को तेज करने में किसानों व मजदूरों, कर्मचारियों को सार्थक समर्थन देने का फैसला किया गया। बैठक में यह भी तय किया गया कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई जा रही जनविरोधी नीतियो के खिलाफ राज्य की दूसरी वामपंथी एवं जनवादी शक्तियों के साथ मिलकर व्यापक एवं जोरदार आंदोलन चलाया जाएगा।

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