किसानों की आय को बढ़ाने के लिए सरसों, मक्का और मूंग की खेती को प्रोत्साहन देने की जरूरत

चंडीगढ़: भारत के कृषि मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि तथा भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मक्का सरसों और मूंग की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एग्रीकल्चर एक्सटेंशन श्री ए के सिंह ने साथ ही साथ भारतीय कृषि में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल जैसे की द्रोण की भी वकालत की।

श्री ए के सिंह ने यह बातें एक कंसलटिंग मीटिंग – इमर्जिंग चैलेंजिस एंड प्लांट प्रोटक्शन ऑफ मेजर खरीफ क्रॉप्स’ जिसका आयोजन एग्री इनपुट कंपनी धानुका ग्रुप के सहयोग से किया गया था, में बोलते हुए कहीं।

सिंह ने कहा कि हमें बड़े पैमाने पर फसल विविधता को बढ़ावा देने की जरूरत है। गेहूं और चावल की खेती को प्रोत्साहन देने के बजाय मक्का, मूंग और सरसों की खेती की ओर ध्यान देना चाहिए जिससे कि हमारे देश को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी साथ ही साथ किसानों की आय में भी इजाफा हो सकेगा ।

भारत अपनी घरेलू आवश्यकता का करीबन 60% खाद्य तेल भाव आयात करता है। साथ ही दालों का भी आयात करता है, यद्यपि कि यह कम मात्रा में किया जाता है।

सिंह ने कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया तथा कृषि क्षेत्र में रिसर्च में लगे हुए संस्थानों को द्रोण के इस्तेमाल के लिए प्रोटोकोल विकसित करने का आह्वान किया।

कंसल्टेशन मीटिंग में बोलते हुए सिंह ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से ही आकस्मिक योजना विकसित करने का पर जोर दिया जिससे कि किसान उसे समय रहते अपना सके।

इस कंसलटेटिव मीट में 30 कृषि विद्यालय से कई जाने-माने कृषि वैज्ञानिक के साथ-साथ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भी वैज्ञानिकों ने शिरकत की। इसमें नीति निर्धारक उद्योग जगत से जुड़े हुए लोग और किसानों ने ने भी हिस्सा लिया।

आर. जी. अग्रवाल चेयरमैन धानुका ग्रुप ने इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट, आधुनिक तकनीक तथा उच्च स्तर के कृषि उत्पादक सामग्री के इस्तेमाल पर जोर दिया।

इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट के तर्ज पर हमें इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट को इस्तेमाल में लाना चाहिए, इससे कृषि से जुड़ी बहुत सारी समस्याओं का समाधान प्राप्त हो सकता है। आज समय की जरूरत है कि हम प्रीसिशन एग्रीकल्चर का उपयोग करें जिससे कि अनाजों के उत्पादन तथा किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

भाग्य से भारत के एग्री इनपुट मार्केट जिसमें कि एग्रोकेमिकल सेक्टर भी शामिल है जिसमें निम्न तथा घटिया किस्म के पदार्थों से भरे पड़े हैं। किसानों के हित में यह आवश्यक है कि इस समस्या का अविलंब ध्यान दिया जाए ताकि सरकार के किसानों के आय को दोगुना करने का उद्देश्य पूर्ण हो सके।

राजबीर सिंह डायरेक्टर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी ने कहा कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर कंसल्टेशन मीट का आयोजन प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से किया जा रहा है और हमें उम्मीद है कि इसमें जो अनुशंसा की जाएगी वह किसानों को भिन्न प्रकार के कीटों और फसल-रोग से मुक्ति में मददगार होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय समेकित कीटनाशी जीवप्रबंध अनुसंधान केंद्र के निदेशक सुभाष चंद्र ने कहा की, इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट तकनीक का इस्तेमाल करने से किसानों को काफी लाभ होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान के निदेशक सुजय रक्षित ने कहा कि,”फसल विविधता समय की मांग है तथा कम समयावधि के फसलों के उत्पादन से किसानों को काफी लाभ हो सकता है” ।

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