बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे: कनेक्टिविटी का फायदा किसानों या कारपोरेट को!

सुसंस्कृति परिहार

अभी हाल ही की बात है बुंदेलखंड के किसानों को फायदा दिलाने उत्तर प्रदेश के छठवें बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का 16 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य कार्यक्रम में उद्घाटन किया। 14,850 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एक्सप्रेस-वे उद्घाटन के पांच दिन बाद धंस गया।  सड़क पर करीब दो फीट गहरा गड्ढा हो गया। धंसी सड़क में एक कार और बाइक  फंसकर क्षतिग्रस्त हो गई।जिसकी चर्चाओं का ज़ोर है ।हालांकि सड़क की मरम्मत के लिए जेसीबी मशीन पहुंची है। इस घटना से हड़कंप मचने के बाद अधिकारियों ने जांच के आदेश भी दे दिए हैं।ज्ञात हो बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास पीएम मोदी ने 29 फरवरी 2020 को किया था। ये 296 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे महज 28 महीनों में ही बनकर तैयार हो गया ।बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का जब शिलान्यास किया गया था, तब 36 महीनों में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन इसका निर्माण तय समय से पहले पूरा कर लिया गया। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 1,132 करोड़ रुपये की बचत की गई है।क्या जल्दबाजी और बड़ी बचत के परिणाम की बदौलत ही सड़क धंसी।यह जांच का विषय है।यह राशि क्यों बचाई गई।आठ महीने पहले उद्घाटन क्यों जरूरी हुआ वगैरह-वगैरह।

इस घटना को लेकर  यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भाजपा पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि ये भाजपा के आधे-अधूरे विकास की गुणवत्ता का नमूना है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का बड़े लोगों ने उद्घाटन किया था। एक हफ्ते में ही इस पर भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े गड्ढे निकल आए। अच्छा हुआ कि इस एक्सप्रेसवे पर रनवे नहीं बना।अखिलेश के इस बयान पर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मंत्री ने जो प्रतिक्रिया दी हैवह दिलचस्प है।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा कि अखिलेश जी सुना है कि आप ऑस्ट्रेलिया से पढ़कर लौटे हैं। अलग बात है कि आप अपने को गूगल मैप का बड़ा जानकार बताते हैं, लेकिन प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री की मर्यादा के अनुसार थोड़ा लिखकर, फिर पढ़कर पोस्ट करना चाहिए. कम से कम बेसिक टेक्निकल नॉलेज तो आपको होनी ही चाहिए।नंद गोपाल नंदी ने कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद विभिन्न तकनीकी परीक्षण कराए जा रहे हैं।स्ट्रेट एज एवं प्रोफाइलोमीटर से सतह असमानता की जांच एवं जहां कहीं भी असमानता है, उसको दूर करने के लिए दोबारा सरफेस लेयर का कार्य किया जा रहा है। मेरी आपको सलाह है कि अपने अल्पज्ञानी सलाहकारों के अधकचरे ज्ञान के भरोसे राजनीति न करें।यह जवाब स्वयं कितना हास्यास्पद और गैरजिम्मेदाराना है जो बहुत कुछ कहता है।

इधर भाजपा सांसद वरुण गांधी भी एक्सप्रेसवे को लेकर हुए हमलावर हुए उन्होंने  ट्वीट कर लिखा कि 15 हजार करोड़ की लागत से बना बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे अगर बरसात के 5 दिन भी ना झेल सके तो उसकी गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के मुखिया, सम्बंधित इंजीनियर और जिम्मेदार कंपनियों को तत्काल तलब कर उनपर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी

विदित हो बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे सात जिलों से होकर गुजर रहा है। यह जिले चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, ओरैया और इटावा हैं। अगर बांदा की बात करें तो अभी यहां के लोगों को दिल्ली पहुंचने में 12 घंटे से भी अधिक का समय लगता था  अब यह सफर सिर्फ 8-9 घंटों में पूरा हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा सभी जिले के लोगों का भी वक्त बचेगा, वहीं इन सातों जिलों में नए उद्योगों के मौके भी खुलेंगे, जो रोजगार पैदा करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि कनेक्टिविटी बढ़ने से यहां की मटर दिल्ली जल्द पहुंचेगी।ताजी मटर का रेट भी अच्छा मिलेगा। उनके घर से मटर बड़े बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता खुल जायेगा। वे कहते हैं बेहतर कनेक्टिविटी होती है तो गांवों में भी किसानों को बेहतर कीमत देने वाले ठेकेदार पहुंच जाते हैं, क्योंकि उस कनेक्टिविटी से उनकी लागत भी घटती है। यानी कुल मिलाकर बेहतर कनेक्टिविटी किसानों को खूब फायदा पहुंचाती है।

 जी हां, ये वही बुंदेलखंड जहां से हर साल किसानों की आत्महत्या की खबरें आती हैं। वही बुंदेलखंड जहां के किसान ऐसी बदहाली में जा पहुंचे हैं कि अपने परिवार को भरपेट खाना तक नहीं दे पा रहे। खबरें तो यहां तक आईं कि बुंदेलखंड में कई किसानों के परिवार घास की रोटी तक खाने को मजबूर हो गए।अब कनेक्टिविटी से किसान को  फायदा मिलेगा या  कारपोरेट को यह तो वक्त ही बताएगा।क्योंकि यातायात और परिवहन जिस तरह मंहगा हुआ है उससे तो यही लगता है इससे कारपोरेट का ही फायदा होने वाला है। लेकिन जो 1100करोड रुपए की राशि की बचत की गई उससे किसका फायदा होगा यह अंधेरे में है।इस वे का क्या  भरोसा वह कब तक साथ देगा अभी जबकि 90% काम हुआ है केन ,बेतवा और सोन नदियों पर पुल बनना बाकी है।इतनी जल्दबाजी आखिरकार क्यों ?यह जानलेवा भी हो सकती है।

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