मैं आस्था हूं

मैं आस्था हूं ,
अगर तुम विश्वास हो।
मैं प्रेम हूं,
अगर तुम सम्मान हो।
मैं मैत्री हूं।
अगर तुम पारदर्श हो ।
मैं ममता हूं।
अगर तुम वत्सल हो।
मैं करुणा हूं।
अगर तुम अपनत्व हो।
मैं क्षमा हूं,
अगर तुम पात्र हो।
मैं शक्ति हूं,
अगर तुम सामर्थ्य हो।
मैं आग हूं,
अगर तुम विध्वंस हो।
मैं नारी हूं पर्वत सी,
अटल हिमगिरि सी
मुझसे प्रेम,करुणा,
शक्ति ,भक्ति,समता
क्षमा,मैत्री,ममताकी
निर्झर-नदियां बहती हैं।
ना लांघ ना ललकार मुझे,
मुझसे ज्वाला धधकती हैं।

मीनाक्षी कुमावत मीरा
रोहिडा(पिंडवाड़ा)
सिरोही ,राजस्थान

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