प्रकृति फाउंडेशन लखनऊ द्वारा आयोजित पारम्परिक अवधी लोकोत्सव

लखनऊ। प्रकृति फाउंडेशन लखनऊ की ओर से आज सामुदायिक हाल कुर्माचल नगर में पारम्परिक अवधी लोकोत्सव का आयोजन किया किया। जिसमें अवध की पारम्परिक लोक संस्कृति के रंग मंच पर कलाकारों द्वारा बिखेरे गये। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री हरीष चदं पंत अध्यक्ष उत्तराखण्ड महापरिषद एवं विषिष्ट अतिथ श्रीमती सरिता सिंह, फाउण्डर निदेषक उडान नृत्य संस्थान एवं अध्यक्ष सामुदायिक केन्द्र श्री नन्दन सिंह खन्नी द्वारा सयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर अवधी लोकोत्सव का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ गुरू एवं कोरियाग्राफर सरिता हरितिमा पंत, रंजना मिश्रा, निधि तिवारी, पियूष पाण्डेय, सरिता सनवाल, भारती श्रीवास्तव, आकाष राजपूत, दिब्या उपाध्याय,राजेष्वरी भट्ट, उमा मणि, वंदना पोरवाल, सीमा पाल, अनामिका वत्स एवं नन्दनी खरे आदि मौजूद रहे। प्रकृति फाउण्डेषन की ओर से सचिव बी0 पी0 सिंह द्वारा मुख्य अतिथि एवं अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर किया गया।

मुख्य अतिथि हरीष चंद पंत ने कहा कि अवध क्षेत्र की भाषा अवधी कहलाती है जो हिन्दी की एक उपभाषा है अवधी का प्राचीन साहित्य बडा ही संपन्न है। अवधी लोक साहित्य की एक समृद्धि परम्परा है। अवधी 6 करोड़ से भी अधिक लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। निष्चित तौर पर आज इस कार्यक्रम से अवधी के संरक्षण सर्वधन एवं विकास को बल मिलेगा। उन्होने संस्था एवं सभी कलाकारों की भूरि भूरी प्रसंसा की। विषिष्ट अतिथि सरिता सिंह ने कलाकारों के अवधी नृत्य एवं गायन को काफी सराहा उन्होने कहा कि अवधी की गारी तो पूरे अवध में प्रसिद्ध है। इसे षादी व्याह में महिलाओं द्वारा गाया जाता है। अवधी लोकोत्सव में निम्न कार्यक्रम संस्था के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किये गये।

गणेष वंदना- श्री गणेषा देवा, कलाकार आदित्य गौतम, ष्षौर्य सिंह, अंजली, दामिनी संत, सूरज वर्मा। स्वागत गीत- सुप्रसिद्ध लोक गायिका हरितिमा पंत जिसके बोल है स्वागतम सुभ आगमन। अवधी लोक नृत्य- फूलों की होली- नटवर नंद किषोर कलाकार- अषिंका षर्मा, वर्षा सिंह,आयुषी षुक्ला, वंषिका षर्मा, परणिका श्रीवास्तव आदि। युगल नृत्य- अवधी बधाई गीत बोल है- जन्मे अवध रघुराई कलाकार- अंजली, दामिनी, आजीदी के अमृत महोत्सव के अवसर पर देष भक्ति गीत-बोल है- एक बार सलामी दे दो उन जवानों के लिए-कलाकार है- भूमिका पटेल, अराधना सिंह, यषस्वी पोरवाल, तेजस्वी पोरवाल। एकल नृत्य – कलाकार है षिक्षा अग्रवाल गीत के बोल – छाप तिलक सब छीनी
अवधी लोक गीत- संस्कार पर आधारित देवी गीत जिसके बोल है नीमा के डाल पै पडो रे डोलना। सोहर गीत जिसके बोल है – धनी धनी मिथिला नगरिया, गायन कलाकार -अरूणा उपाध्यया,सरिता सनवाल, राजेष्वरी भट्ट, उमामणी आदि।

अवधी नकटा- द्वी चार चुडियन के बीच कंगना। अवधी कजरी नृत्य- बरसन लागी बदरिया, कलाकार -सीमा पाल, अनामिका वत्स, नन्दनी खरे, एकल नृत्य- बोल है अवधी लोक नृत्य गोरा मुखडा गुलाबी चुनरिया कलाकार परणिका श्रीवास्तव अवधी सामुहिक लोक लोकनृत्य – बोल है कैसे खेलन जइयो सावन मा। कलाकार है भूमिका पटेल, अराधना सिंह, यषस्वी पोरवाल, तेजस्वी पोरवाल। पारम्परिक अवधी मयूर नृत्य- कान्हा मोर बन आयो, कलाकार है कामिनी सिंह, विषाल। पारम्परिक लोक नृत्य- जिसके बोल है – ताल से ताल मिला कलाकार है दिब्या उपाध्याय, सौम्या, गुनगुन एवं पलक आदि।

पारम्परिक भोजपुरी लोकगीत-जिसके बोल है अंगूरी मै डवसले बिया नगिनिया एवं बतारे मनवा कौने गुइया पानी को जाउ। कलाकार लोक गायिक रंजना मिश्रा। अवधी लोक नृत्य- जिसके बोल है पिया मेंहदी ले आ दा मोती झील कलाकार है दिब्या उपाध्याय, सौम्या, गुनगुन एवं पलक। एकल गायन- भारती श्रीवास्तव भोजपुरी गीत जिसके बोल है- कहे तोसे सजना ये तोहरी सजनिया। एकल नृत्य – पारम्परिक लोक नृत्य कलाकार- कीर्ति राज षर्मा अवधी लोक नृत्य- बोल है देखो चोर हरि मेरो मन ले गयो चुराय- कलाकार- कामिनी सिंह एवं विषाल।वाद्य यत्र कलाकार- रमेष कष्यप नाल पर, षषांक षर्मा हारमोनियम पर, नन्दन सिंह खन्नी बासुरी पर। अतं में मुख्य अतिथि एवं विषिष्ट अतिथियों को संस्था द्वारा मुख्य अतिथि के कर कमलो द्वारा अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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