पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों द्वारा 12 घंटे के बंद से जनजीवन रहा प्रभावित

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के आह्वान पर शुक्रवार को 12 घंटे के बंद का असर जनजीवन पर दिखाई दिया। यह बंद राज्य सचिवालय नबन्ना से मार्च करते समय वामपंथी दल कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस के बर्बर कार्रवाई के खिलाफ बुलाया गया था।

राज्य में कोरोना के मद्देनजर पिछले 11 महीने के बाद नौंवी से 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल खुल रहे हैं। वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने आसनसोल, बर्धमान, मालदा, रायगंज, दनकुनी और कोलकाता के कुछ हिस्सों में—उत्तरी 24 परगना और नादिया जिलों में रेल की पटरियां और सड़कें जाम किए।

बंद सुबह छह बजे से किया गया था। प्रदर्शनकारियों द्वारा कुछ जगहों में टायरों में आग दी वहीं कुछ जगह पुलिस कर्मियों को गुलाब के फूल भी दिए।

बताते चलें कि नौकरियों और बेहतर शिक्षा सुविधाओं की मांग को लेकर ‘नबन्ना अभियान’ में शामिल वामपंथी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बीते बृहस्पतिवार को मध्य कोलकाता के एस्पलेनेड इलाके में अवरोधक हटाने को लेकर झड़प हो गई थी। पुलिस के इस बर्बर कार्रवाई के खिलाफ वाममोर्चा के अध्यक्ष बिमान बोस ने आह्वान करते हुए दावा किया था कि पुलिस कार्रवाई में करीब 150 छात्र, युवक एवं युवतियां घायल हुए है।

सार्वजनिक वाहनों की सामान्य आवाजाही सुचारू करने के लिए सड़कों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गयी थी।। वामपंथी नेता सुजान चक्रवर्ती के अनुसार लोगोें ने बंद का समर्थन किया है।

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