कॉमरेड कैफ़ी आज़मी की 102वीं जयंती मनाई गयी

रिपोर्ट-जितेंद्र हरि पांडेय
आज़मगढ़: “इतना तो जिंदगी में किसी की खलल पड़े, हंसने से हो सुकून ना रोने से कल पड़े”। कैफी आज़मी ने मात्र 11 वर्ष की उम्र में यह गज़ल लिखकर सबको अचंभित कर दिया था। इंकलाबी, तरक्कीपसंद शायर कैफ़ी आज़मी का जन्म उप्र आज़मगढ़ जिले में फूलपुर तहसील के पास एक छोटे से गाँव मिजवां में 14 जनवरी सन 1919 में हुआ था। इनके बचपन का नाम अतहर हुसैन रिजवी और पिता का नाम फ़तेह हुसैन रिजवी था।

इनकी प्रारंभिक तालीम बाबू खान मदरसे से सुरु होकर लखनऊ के मदरसे तक हुई। कहते हैं लखनऊ में इंकलाबी जेहन रखने वालों का संग साथ हुआ। वर्ष 1936 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़कर लखनऊ से कानपुर होते हुये वर्ष 1943 में मुम्बई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यालय खेतवाड़ी बुला लिया गया, जहाँ उन्होंने पार्टी अखबार मजदूर मोहल्ला में लेखन शुरू किया।

वर्ष 1951 में बुजदिल फ़िल्म के लिये पहली बार फिल्मी गीत का लिखने का अवसर मिला। उसके बाद फ़िल्म हकीकत, कागज के फूल, शोला और शबनम, अनुपमा, हीर-रांझा, दो दिल, कोहरा आदि लिखकर सिनेमा जगत में अपनी एक अलग पहचान बनायी। कैफ़ी साहब को उर्दू के साहित्य अकादमी, फ़िल्म फेयर, सोवियत लैंड नेहरू आदि पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया।

मुख्य अतिथि एसडीएम फूलपुर रावेन्द्र सिंह सम्बोधित करते हुए


वर्ष 1973 में ब्रेनहेमरेज लकवा से लड़ते हुये उनके जीवन को एक नया दर्शन मिला-बस अब दूसरों की लिए जीना है। इस सोच और ज़िद के साथ मायानगरी मुम्बई को छोड़कर कैफ़ी आज़मी अपनी सरजमीं मिजवां आ गए । गाँव मे सबसे पहले फ़तेह मंजिल मकान, बाग, प्राथमिक स्कूल, सड़क, पोस्ट ऑफिस के लिये अथक प्रयास करके स्थापित कराये। बाद में बालिकाओं के लिये जूनियर हाई स्कूल, इंटर कॉलेज भी शुरू कराये। उनके ही प्रयास से आज गाँव मे विद्युत उपकेंद्र, अस्पताल, टेलीफोन टॉवर आदि संचालित हो रहे हैं।

मिजवां वेलफेयर सोसायटी के द्वारा कैफी आज़मी कम्प्यूटर सेंटर और चिकनकारी सेंटर उनकी पुत्री सिनेअभिनेत्री पूर्व सांसद शबाना आज़मी की देखरेख में संचालित हो रहा है। जिससे गाँव के युवक और युवतियां रोजगार पाकर आत्मनिर्भर हैं।
“वक्त ने किया क्या हसीं सितम” के गीतकार,शायर कैफ़ी आज़मी ने10 मई2002 को मुम्बई में अंतिम सांस ली। कैफ़ी आज़मी अपनी तकरीर में अक्सर कहा करते थे कि मैं गुलाम हिंदुस्तान में पैदा हुआ,आज़ाद हिंदुस्तान में जी रहा हूँ और समाजवादी हिंदुस्तान में मरना चाहता हूँ। उनकी मृत्यु के बाद फ़तेह मंजिल मिजवां में उनकी और उनके पिता की प्रतिमा स्थापित की गयी। उनके पिता की प्रतिमा के नीचे उर्दू में शेर “महक खुलूस की इस संदली गुबार में है, मोहब्बत आज भी जिंदा मेरे दयार में है।

कैफ़ी आज़मी जिस समाजवाद को देखना चाहते थे उनकी प्रतिमा के नीचे उनका ही चर्चित शेर “कोई तो सूद चुकाये कोई तो जिम्मा ले, उस इंकलाब का जो आजतक उधार सा है”। उनकी प्रतिमा के पास हमेशा जिससे वे बेहद लगाव रखते थे वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का लाल झंडा लगा रहता है।


उनके जन्म शताब्दी वर्ष पर उनके पुत्र बाबा आज़मी ने उनकी याद में मिजवां गाँव मे एक सामाजिक हिंदी फीचर फिल्म “मी रक़्सम” बनाया जो एक यादगार फ़िल्म साबित हुई। हर वर्ष की भांति 14 जनवरी 2021 को मिजवां फ़तेह मंजिल में उनका 102वां जन्मदिन मनाया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम फूलपुर रावेन्द्र सिंह, हरिमंदिर पांडेय व पूर्व एमएलए श्याम बहादुर यादव ने दीप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया। इस बीच कॉमरेड कैफ़ी आज़मी को लाल सलाम, कैफ़ी आज़मी के सपनों को हम मंजिल तक पहुंचायेंगे, कमाने वाला खायेगा, लूटने वाला जायेगा, नया जमाना आयेगा आदि नारे लगाये गए।

हरिमंदिर पांडेय सम्बोधित करते हुए


फ़िल्म मी रक़्सम की नायिका अदिति सुवेदी ने प्रख्यात शायर, गीतकार जावेद अख्तर द्वारा कैफ़ी आज़मी को समर्पित रचना ‘अजीब आदमी था वो’ को सुनाकर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। सानिया, नाज़िया बानो, सुषमा विंद, रूपांसी यादव ने कैफ़ी आज़मी की रचना “उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे” सुनाया। अंजू मौर्या ने कैफ़ी की नज्म “प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा, गम किसी दिल मे सही गम को मिटाना होगा” को सुनाया। मोहम्मद कमर, अल्का गौड़, नेहा गौड़ ने भी गीत सुनाये।


उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुये हरिमंदिर पांडेय ने कहाकि कैफ़ी साहब हंसमुख व्यक्तित्व, सादगीपूर्ण जीवन और प्रतिवद्ध कॉमरेड थे। कैफ़ी आज़मी की प्रतिवद्धता के चलते ही उनका पूरा परिवार फ़िल्म, साहित्य, राजनीति और समाज मे जिन ऊंचाइयों पर है ऐसा एक परिवार शायद ही विश्व मे कोई दूसरा हो। इस अवसर पर हरिगेन राम, पी आर गौतम,राजेश कुमार यादव आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर चिकनकारी सेंटर की प्रमुख संयोगिता, मनोज, जय किसन पांडेय, गोपाल, सीताराम, जयराम, मो0सादिक, पत्रकार रियासत हुसैन,अखिलेश विश्वकर्मा, रामफेर, महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी प्रभात पांडेय, श्वेता प्रजापति आदि उपस्थित रहे। कैफ़ी आज़मी द्वारा प्रयोग किये गये सामानों, वस्त्रों की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी।अध्यक्षता मिजवां वेलफेयर सोसायटी के डिप्टी मैनेजर आशुतोष त्रिपाठी और संचालन जितेंद्र हरि पांडेय एडवोकेट ने किया।


वहीं आज़मगढ़ के हरैया ब्लॉक में भारतीय जननाट्य संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कैफ़ी आज़मी इप्टा आज़मगढ़ ने याद किया। वरिष्ट साहित्यकार पूर्व कुलपति के गाँव मे उनके द्वारा स्थापित रामानंद सरस्वती पुस्तकालय,जोकहरा में जन नाट्य अकादमी और इप्टा द्वारा संयुक्त सांस्कृतिक आयोजन कर कैफ़ी आज़मी को याद किया गया।मुख्य विकास अधिकारी आज़मगढ़ के कार्यालय में भी कैफ़ी आज़मी के जन्मदिन पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। ऑल इंडिया कैफ़ी आज़मी अकेडमी निशातगंज लखनऊ में सरवत मेंहदी और बहराइच में जहाँ कैफ़ी आज़मी का कुछ बचपन बीता था।वहाँ शायर शारिक रब्बानी और साथियों ने कैफ़ी आज़मी को याद किया।

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