चौथी इमिग्रेंट्स सुरक्षा कॉन्फ्रेंस, सुरक्षा समेत कई मुद्दे पर व्यापक चर्चा

नई दिल्ली। अप्रवासी भारतीयों के संरक्षण के लिए दिल्ली में चौथी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी का देश ने एक साथ मिलकर मुकाबला किया, धीरे-धीरे स्थितियां सुधर रही हैं और यही सही समय है कि दुनिया में जो नए अवसर बन रहे हैं उनके लिए तैयारी की जाए।

इमिग्रेंट्स के संरक्षणकर्ताओं की ये जिम्मेदारी है कि वो इमिग्रेंट्स को ‘ब्लू कॉलर’ वर्कर्स के रूप में तैयार करें साथ ही जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा भी दें।युवाओं और कामगारों के लिए दूसरे देशों में जगह और काम के अवसरों को तलाशने में इमिग्रेंट्स संरक्षणकर्ता का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके लिए ब्रिटेन और भारत के बीच मोबिलिटी पार्टनरशिप को लेकर समझौता हुआ है। साथ ही जापान के साथ 14 निर्दिष्ट सेक्टर्स में स्किल्ड वर्कर्स के साथ काम के लिए कैबिनेट स्तर पर समझौता किया गया है, इसके अलावा हाल ही में कैबिनेट ने पुर्तगाल के साथ भी कुशल कामगारों की गतिशीलता को लेकर मंजूरी दी है।

अप्रवासी भारतीयों की सुविधा और कल्याण के लिए चल रही तमाम योजनाओं में बदलाव और सुधार किए गए हैं। जिसमें प्रवासी भारतीय बीमा योजना, प्री डिपार्चर ओरिएंटेशन ट्रेनिंग और इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड जैसी योजनाएं हैं। इसके साथ ही ई-इमिग्रेंट्स प्लेटफॉर्म पर भी काम चल रहा है।

कार्यक्रम में सचिव (CPV & OIA) संजय भट्टाचार्य ने बताया कि वैश्विक महामारी के समय में विदेशों में फंसे हजारों भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया गया। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ई-माइग्रेंट प्लेटफॉर्म को पूर्वी एशिया और यूरोपीय देशों में नए अप्रवासी गलियारे की मान्यता के साथ-साथ सभी देशों के लिए खोल दिया गया है।

पीओई सम्मेलन के सत्र में, संयुक्त सचिव (विदेश रोजगार) और प्रवासियों के संरक्षक जनरल, श्री टी. आर्मस्ट्रांग चांगसन, विदेश मंत्रालय के अन्य अधिकारी और प्रवासियों के 13 संरक्षक (POE) ने PDoT और अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर चर्चा की। सुरक्षित और कानूनी प्रवास की सुविधा के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा कार्यक्रम, पंजीकृत भर्ती एजेंसियों के संघों के प्रतिनिधि, विचारों और सुझावों का आदान-प्रदान करने के लिए सम्मेलन में शामिल हुए। इसके अलावा सम्मेलन में शोषण, धोखाधड़ी और अवैध आप्रवासन या मानव तस्करी को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने के विषय पर भी चर्चा की गई।

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