विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र का निजीकरण पर पुनर्विचार प्रधानमंत्री करें: डी राजा

नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) महासचिव डी राजा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर अनुरोध किया कि विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र का निजीकरण करने के फैसले पर सरकार पुनर्विचार करे।

डी राजा ने पत्र में लिखा है कि आर्थिक मामलों पर मंत्रिमंडल की समिति (CCEA) ने आरआईएनएल के निजीकरण को मंजूरी दी थी, जिससे कर्मचारियों के बीच रोष पैदा हो गया है।

भारत सरकार के उद्यम राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) को विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र के नाम से भी जाना जाता है।

भाकपा महासचिव डी राजा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कहा है कि इस विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए 50 साल पहले 23,000 एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर किया गया था।

उस समय किसानों को उनके जमीन पैसा उचित मुआवजे रूप में नहीं मिला था।

अब इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में हो गयी है। यदि इस समय विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र को निजीकरण की अनुमति दी जाती है तो कोई निजी कंपनी इस्पात संयंत्र का अधिग्रहण करेगी और जमीन हड़प लेगी।

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि इस संयंत्र को चलाने की सभी संभावनाएं तलाशने की कोई कोशिश नहीं हो रही है।

विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की कोई खदान आवंटित नहीं की गई। डा राजा ने दावा किया कि सभी निजी इस्पात संयंत्रों को लौह अयस्क की खदानें मिलती हैं।

भाकपा महासचिव ने पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र से लाखों लोगों प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलता है।

उन्होंने पत्र में कहा है कि आंध्र प्रदेश के लोग, राजनीतिक पार्टियां और मजदूर संघ निजीकरण के इस विनाशकारी कदम का विरोध कर रहे हैं।

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