किसान संघर्ष समन्वय समिति के भारत बंद को सफल करने हेतु सड़कों पर उतरे हजारों किसान

दरभंगा-बिहार। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत अखिल अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आवाह्न पर भारत बंद के दौरान हजारों की संख्या में जिला के किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार चौधरी के नेतृत्व में प्रातः 7:00 बजे से ही सड़कों पर उतर गए थे।

राज मैदान से हजारों किसानों का जत्था कामरेड भोगेंद्र झा चौराहा, आयकर चौराहा होते हुए दरभंगा स्टेशन पर पहुंचा। जहां बिहार संपर्क क्रांति को 20 मिनट तक रोके रखा। उस दौरान कार्यकर्ता ट्रेन के इंजन और पटरी पर जमे रहे। सरकार के विरोध नारेबाजी की जहां सैकड़ों किसानों को आरपीएफ थाना अध्यक्ष ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तार के तदुपरांत किसानों का जत्था शास्त्री चौक, मिर्जापुर चौक, दरभंगा टावर, हसन चौक, गुदरी बाजार आदि को बंद करवाते हुए कॉमरेड भोगेंद्र झा चौराहा पर शहर के दोनों मुख्य मार्गों को जाम कर 12:00 बजे तक वहां पर जमे रहे।

वहीं बंद के दौरान कॉमरेड भोगेन्द्र झा चौराहा पर किसान सभा के पूर्व जिला अध्यक्ष अहमद अली तमन्ने, किसान नेता महेश दुबे, मजदूर नेता भूषण मंडल के संयुक्त अध्यक्षता में एक सभा हुई। जिसको संबोधित करते हुए सीपीआई के खेत मजदूर यूनियन के जिला सचिव सुधीर कुमार ने कहा कि आज 9 महीने से किसान दिल्ली के बोडरों पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। किसान का मात्र मांग यह है कि तीनों कृषि विरोधी काला कानून वापस ले, बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस ले, एमएसपी की गारंटी करें, वही सरकार अपने निजी करणनीति को वापस ले, मिथिलांचल के अंदर बाढ़-सूखाड का स्थाई निदान करें आदि हैं।

विगत 9 महीना में लगभग 700 किसानों ने इस आंदोलन में अपनी जान की आहुति दिए। लेकिन केंद्र के तानाशाही मोदी सरकार किसानों से सकारात्मक वार्ता करने की वजह उसे विभिन्न शर्त देकर आंदोलन खत्म करने का दबाव बना रही है। बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन के खिलाफ जब देश के अंदर विभिन्न जगहों पर किसानों ने आंदोलन किया तो उन जगहों पर भी सरकार ने आंदोलन के दमन करने का प्रयास किया। हरियाणा के करनाल में किसानों के आंदोलन पर सरकार ने बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया। जिसमें कई किसान जीवन मौत से अभी भी जूझ रहे हैं। देश की 70% आबादी जहां कृषि पर निर्भर है। उस देश के अंदर सरकार कृषि को अपने कारपोरेट मित्रों के हाथों में सौंप कर देश को फिर गुलामी की जंजीर में धकेलना चाहती है।

किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजीव चौधरी ने कहा कि सरकार एक-एक कर सभी सरकारी संपत्तियों को अपने कॉरपोरेट्स मित्रों के हाथों में गिरवी रख रही है। मिथिलांचल के अंदर बाढ़ सूखा का स्थाई निदान नहीं करके सरकार बाढ़ राहत के नाम पर बिहार के अंदर अरबों रुपए की लूट करती है। 3 वर्षों से मिथिलांचल के अंदर किसान कर्ज में डूब रहा है। खेती किसानी घाटे का सौदा हो गया है।

सरकार राहत के बजाय कृषि विरोधी कानून ला रहा है। अगर सरकार मिथिलांचल के अंदर बाढ़ सूखा का स्थाई निदान नहीं करेगी तो दिल्ली के तर्ज पर मिथिलांचल के किसान भी बिहार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। वही सभा को सीपीआई राज्य परिषद् सदस्य शत्रुघ्न झा, एस यू सी आई सी के नेता सुरेंद्र दयाल सुमन, किसान नेता विश्वनाथ मित्र, युवा नेता बरूण कुमार झा,चन्द्रभूषण झा, सुखदेव महतो, रामनाथ पंजियार, सीता राम साह, वकील साह, हरे कृष्ण राम, हर्ष राज वर्धन, ध्रुव नारायण महासेठ, गौतम कांत चौधरी, आनंद कुमार, आशुतोष कुमार मिश्र, महिला नेत्री विद्या देवी, श्यामा देवी, सीपीएम नेता दिलीप भगत आदि उपस्थित थे।

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