अनुसूचित जाति और जनजातियों का कैसे भला होगा- आदिवासी महासभा

सिवनी (मध्य प्रदेश) । अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के उप प्रांत अध्यक्ष कामरेड डीडी वासनिक ने प्रेस को बताया कि वर्तमान समय में अनुसूचित जाति के व्यक्ति का देश के सर्वोच्च पद पर माननीय रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद पर आसीन एवं माननीय द्रोपदी मुर्मू जो कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से आती हैं और 25 जुलाई को देश के राष्ट्रपति सर्वोच्च पद पर आसीन हो जावेगी, दोनों ने राष्ट्रपति पद से निवर्तमान एवं भावी  राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के पूर्व धार्मिक अनुष्ठान किया इससे सनातनी लोग बहुत खुश हुए होंगे परंतु जिस वर्ग का यह दोनों माननीय प्रतिनिधित्व करते हैं वे क्या सोचते हैं इस पर गौर करना चाहिए। इस देश के अधिकांश अनुसूचित जाति के जागरूक लोग वर्णाश्रम वाले हिंदू धर्म में रहना नहीं चाहते हैं और धड़ाधड़ बौद्ध धर्म अपना रहे हैं।

इसी तरह से इस देश के अनुसूचित जनजाति के आदिवासी लोग अपने आपको हिंदू नहीं मानते हैं और वह भी वर्ण व्यवस्था वाले धर्म में नहीं रहना चाहते हैं जिसमें ऊंच-नीच और भेदभाव भरा हुआ हो ऐसे में दोनों माननीय के द्वारा ब्राह्मण पुजारी द्वारा अनुष्ठान करना देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करता है वैसे भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रमों में किसी धर्म विशेष के लोगों को बुलाना उचित नहीं है इसी परिपेक्ष में यह ध्यान होना चाहिए कि जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में बताया है कि आदिवासी हिंदू नहीं है फिर दोनों समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले सर्वोच्च व्यक्तियों को अपने अपने समुदाय एवं देश के धर्मनिरपेक्ष सविधान का ध्यान रखना चाहिए।

इसीलिए अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के जिलाध्यक्ष पुनाराम कुमरे सहित पीआर इनवाती आईएल मसराम जगदीश मरकाम जागेश्वर परते प्रदीप मरावी बीसी वीके आदि ने किसी भी सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्तियों को सार्वजनिक रूप से किसी भी धर्म विशेष के अनुसार कार्यक्रम ना करने की अपील की है जिससे देश का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बना रहे।

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