सरकारी उद्यमों को बेचने के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

सी. श्रीकुमार
हमारे देश के प्रतिष्ठित सांसदों ने देश की 41 आयुध फैक्टरियों को तोड़कर सात कंपनियां बनाकर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डालने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने सरकार से अपील की कि सरकार तत्काल अपने फैसले को वापस ले। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का विनिवेश करने, निजीकरण करने और परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण आदि के द्वारा बेचने के लिए सरकार की आलोचना की। सांसदों ने देश की जनता से आह््वान किया कि एकजुट हाकर वर्तमान मोदी सरकार द्वारा अपनाई गई जनविरोधी नीतियों का विरोध करें।

ये सांसद आल इंडिया डिफेंस एम्पलाॅयीज फेडरेशन संबंधित अवाडी आर्डेनेंस क्लोथिंग फैक्टरी वर्कर्स यूनियन (ओसीएफडब्ल्यूयू) द्वारा आयेाजित सेमिनार में शामिल हुए थे।

24 अप्रैल 2022 को ‘‘भारतीय संसद में क्या हो रहा है, विषय पर यह सेमिनार आयोजित की गई थी।

ओसीएफडब्ल्यूयू के कार्यकारी अध्यक्ष एन.जे. रमन ने सेमिनार कार्यवाही की अध्यक्षता की। यूनियन के महासचिव सी. श्रीकुमार ने परिचयात्मक टिप्पणी की। सेमिनार में शामिल होने वाले पांच प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं-भाकपा से बिनोय विश्वम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से एस. तिरुनवकरसर, द्रमुक से टी. के. एस. इलांग्वन, भाकपा से के. सुब्बारायन और माकपा से एस. वेकेंटेशन।
सभा को संबोधित करने वाले सांसदों ने संसद को जनतांत्रिक प्रक्रिया से ना चलाने के लिए मोदी सरकार की आलोचना की और किस तरह से विभिन्न नीतिगत विषयों, संसद में रखे गए विभिन्न अधिनियमों पर चर्चा करने से मोदी सरकार रोक रही है। इसकी भत्र्सना की।

विवादास्पद कृृषि कानूनों, अनिवार्य रक्षा सेवा कानून, श्रम कानूनों और अन्य कानूनों को जिस तरह इस सरकार के द्वारा बिना चर्चा के पास किया गया, ये सांसद इस तरह की गैर-जनतांत्रिक संसदीय प्रक्रियाओं की आलोचना कर रहे थे। इस सरकार ने संसद की स्थायी समिति, संसदीय प्रवर समिति में विवादास्पद अधिनियमों की जांच-पड़ताल की प्रक्रिया की पूरी उपेक्षा की है।

ओ. सी. एफ डब्ल्यूयू की डायमंड जुबली आर्गेनाइजेशन कमेटी ने मेहनतकश जनता के मुद्दों को विशिष्ट रूप से संसद में उठाने के लिए बिनोय विश्वम एवं अन्य चारों सांसदों को ‘जनता का सांसद सम्मान’ पेश किया।

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