भाकपा का इतिहास-संघर्षों का इतिहासः पवन शर्मा

बिलासपुरः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 95वां स्थापना दिवस 26 दिसंबर 2020 को शहीद चन्दशेखर आजाद नगर स्थिति देवरीखुर्द ब्रांच कार्यालय में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेमिनार कर मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता काशीराम ठाकुर ने की। सेमिनार के पूर्व शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर झंडा वंदन किया गया। झंडा वंदन के पश्चात सेमिनार सेमिनार का आयेाजन दोपहर 1 बजे से किया।


सेमिनार को संबोधित करते हुए भाकपा के वरिष्ठ नेता विजय शर्मा ने पार्टी के अंगे्रजी काल में संघर्षों को याद करते हुए आजादी के आंदोलन में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका एवं कुर्बानियों का उल्लेख किया। मजदूर नेता ए बी राय ने मजदूर-किसानों को संगठित कर संघर्ष तेज करने की अपील करते हुए केन्द्र सरकार को कार्पोरेट घरानों की कठपुतली सरकार बताया। नौजवान नेता विक्रांत शर्मा ने उपस्थित छात्रों-नौजवानों से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के मुद्दों पर संघर्ष करने की अपील करते हुए केन्द्र व राज्य सरकारों को फेल करार दिया। सीपीआई माले के नेता लल्लन सिंह ने देश के विकास और समृ(ि में कम्युनिस्ट आंदोलन तथा संसदीय राजनीति में कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका पर प्रकाश डाला। छात्र नेता धीरज शर्मा ने शिक्षा के बाजारीकरण पर चिन्ता व्यक्त करते हुए के जी से पीजी तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा आवश्यक होने का विचार रखा तथा केन्द्र व राज्य सरकार की नीतियों को भेदभावमूलक बताया।

अधिवक्ता लखन सिंह ने समाजवादी राज्य को कायम करने तथा पूंजीवादी लोकतंत्र के खिलाफ संघर्ष तेज करने की अपील करते हुए उपस्थित छात्र-नौजवान, मजदूर-किसानों, महिलाओं, के पूंजीवाद के विरू( संघर्ष तेज करने का विचार व्यक्त किया, साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानूनों को काला कानून करार दिया। भाकपा के जिला सचिव पवन शर्मा ने कम्युनिस्ट पार्टी की भूमिका, महत्ता, इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कम्युनिस्ट आंदोलन को गौरवमयी, संघर्षों का इतिहास व कुर्बानियों का इतिहास बताते हुए चटगांव विद्रोह, मेरठ षडयंत्र केस, लौहार षडयंत्र केस का जिक्र किया। साथ ही आजाद भारत में कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा देश के मजदूर किसानों, छात्र-नौजवानों कर्मचारियों, श्रमिक वर्गों के हित में किए गए कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों से मजदूर वर्ग का राज कायम करने व पूंजीपतियों के राज को खत्म करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप उदय राम टंडन, संतोष परिहार, झंडीराम यादव, पूनाराम धुरी, बी अपपा राव, संत निराला, मनसाराम ठाकुर, भरत लाल धुरी, रामरतन ध्रुव, पावेल, विनय शर्मा, किशन कुमार, चिल्लू सिंह, संबोधन-विजय शर्मा, ए बी राय, बी अप्पा राव, विक्रांत शर्मा, लल्लन सिंह, धीरज शर्मा, लखन सिंह अधिवक्ता, पंडित रामशरण पाठक, संजय सिंह, बिल्लू बिंदास आदि के द्वारा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

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