ई-फार्मेसी के चलते देश के करोड़ों रिटेल केमिस्टों का व्यापार  प्रभावित : सुभाष अग्रवाला 

आसनसोल. कन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पश्चिम बंगाल के चेयरमैन सुभाष अग्रवाला ने कहा कि देश में अनेक बड़े विदेशी और देशी कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा की जा रही ऑनलाइन फ़ार्मेसी द्वारा ड्रग एवं कॉस्मैटिक क़ानून की लगातार अवहेलना करते हुए आपूर्ति की जा रही दवाइयों ने न केवल देश के करोड़ों थोक और खुदरा केमिस्टों के व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है l बल्कि उपभोक्ता विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण भारतीय उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को खतरे में डालते जा रहे हैं l

श्री सुभाष अग्रवाला ने कहा कि इस मुद्दे पर कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया से इस महत्वपूर्ण मुद्दे को तत्काल प्रभाव से संज्ञान में लेने  का आग्रह किया है। इस विषय की गंभीरता को देखते हुए कैट ने मई 2022 के पहले सप्ताह में देश के विभिन्न राज्यों की प्रमुख केमिस्ट एसोसिएशनों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित करने का निर्णय लिया है।

सम्मेलन इस मुद्दे पर भविष्य की कार्रवाई तय करेगा और इस बीच कैट का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही स्वास्थ्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया और वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेगा और उन्हें देश में ई-फार्मेसियों के नियम एवं क़ानून के स्पष्ट उल्लंघन के बारे में अवगत कराएगा। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा की देश में  दवाओं का निर्माण, आयात, बिक्री और वितरण औषधि और प्रसाधन सामग्री क़ानून और नियमों द्वारा नियंत्रित होता है।इस अधिनियम के नियम कड़े हैं और न केवल प्रत्येक आयातक, निर्माता, विक्रेता या दवाओं के वितरक के लिए एक वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है, बल्कि यह भी अनिवार्य है कि सभी दवाओं को केवल एक पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा ही दिया जाए। हालांकि, ई-फार्मेसी मार्केटप्लेस हमारे देश के कानून की खामियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाएं बेचकर और पंजीकृत फार्मासिस्ट के बिना दवाओं का वितरण करके निर्दोष भारतीय उपभोक्ताओं के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

श्री भरतिया और श्री खंडेलवाल ने कहा कि सरकार को केवल उन्हीं ई-फार्मेसियों को अनुमति देनी चाहिए जिनके पास ऐसी दवाएं हैं जिन्हें ई-फार्मेसी पर बेचने की अनुमति है और इसके अतिरिक्त सभी  शेष ई-फार्मेसी को बंद करने के निर्देश देने चाहिए l श्री भरतिया और श्री खंडेलवाल ने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है  कि सभी दवाएं केवल पंजीकृत खुदरा फार्मेसी से वितरित की जाए l क्योंकि केवल एक पंजीकृत फार्मासिस्ट द्वारा उचित सत्यापन प्रक्रिया का पालन करने के बाद यह सुनिश्चित किया जाता है कि उपभोक्ताओं को ठीक वही मिले जो वे ऑर्डर करते हैं।

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