आईपीएस (सेंट्रल) एसोसिएशन ने विशेषज्ञों के साथ कोरोना पर की वैक्सीन वार्ता

नई दिल्ली, सेंट्रल इंडियन पुलिस सर्विस एसोसिएशन (सीआईपीएसए ) ने  कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस की भूमिका और संक्रमण के खतरे से बचाव को लेकर शनिवार को वर्चुअल सेशन वैक्सीन वार्ता का आयोजन किया गया।  

इसमें पुलिस कर्मियों को महामारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई तथा कोविड वैक्सीन के बारे पुलिस कर्मियों की शंकाओं का जवाब दिया गया। 

वैक्सीन वार्ता के दौरान एईएफआई (टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटना) के सदस्य डॉ. एनके अरोड़ा ने बताया कि भारत में कोरोना वैक्सीन से होने वाले दुष्प्रभाव का प्रतिशत बहुत कम है।

अब तक देशभर में चार करोड़ लोगों को कोरोना का वैक्सीन लग चुका है।

यहां एक हजार लोगों में केवल चार और दस हजार में चालीस लोगों मे कोरोना वैक्सीन का दुष्प्रभाव देखा गया।

आईपीएस संजीव अरोड़ा के सवाल का जवाब देते हुए एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि वैक्सीन की दोनों डोज के बाद छह महीने से एक साल तक की सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने जोखिम के खतरे वाले समूह को बहुत आकलन कर तैयार किया है, कोविड से होने वाले 78 प्रतिशत मौतें पचास साल से अधिक लोगों की थी इसलिए प्राथमिक सूची में स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंट लाइन वर्कर, बुजुर्ग और कोमोरबिड समूह को शामिल किया गया है।

देश के 30 लाख पुलिस कर्मचारी महामारी के दौरान अति आवश्यक सेवा को पूरा करने के लिए दिन-रात काम करते रहे।

आईपीएस फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार देशभर में लगभग (भारतीय पुलिस फाउंडेशन के अनुसार) दो लाख पुलिस कर्मी कोरोना संक्रमण के शिकार हुए और 1120 पुलिसकर्मियों की संक्रमण की वजह से मौत हो गई।

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