एलआईसी में सरकार के हिस्से की बिक्री एक प्रतिगामी कदमः भाकपा

नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने आज (28 अप्रैल, 2022) निम्नलिखित बयान जारी कर स्टेट सेक्टर की इकाइयों के निजीकरण की होड़ को तत्काल रोकने की मांग कीः

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव ने कहा कि यह बहुत खेद की बात है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार मौद्रीकरण नीति और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण के माध्यम से सभी राष्ट्रीय संपत्तियों को बेचने पर तुली हुई है। त्रासदी यह है कि उन लंबी अवधि की संपत्तियों को मौजूदा खर्च को पूरा करने के लिए और राजस्व एकत्र करने के लिए बेचा जा रहा है और साथ ही यह सरकार की विफलता है कि वह पहले के उच्च कार्पोरेट करों को बनाए रखकर या जरूरी होने पर उन्हें बढ़ाकी भी पर्याप्त वित्त हासिल कर सकती थी, हालांकि वित्त की यह कमी और नुकसान उसे दक्षिणपंथी यूएस-माॅडल आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाने के कारण हुआ है।

बिकवाली हमारे संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करने के लिए है, जो इसके विपरीत घरेलू और विदेशी दोनों कारपोरेट्स को लाभान्वित करेगी। प्रतिगामी दक्षिणपंथी उपायों को जारी रखते हुए, मोदी सरकार ने घोषणा की है कि देश के प्रमुख वित्तीय संस्थान, एलआईसी में सरकार की शेयर पूंजी को बेचा जाएगा।

इस तरह की बिक्री से एलआईसी के 22 करोड़ शेयर निजी हाथों को दिए जा रहे हैं जिससे केंद्र सरकार को करीब 20,000 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा।

यह कदम पूरी तरह से प्रतिगामी कदम है, जोकि एलआईसी पाॅलिसी धारकों और राष्ट्रीय हितों के विरूद्ध है।

पार्टी सरकार से निजीकरण की होड़ को रोकने के साथ-साथ अपनी राष्ट्रीय संपत्ति की बिक्री को तुरंत रोकने का आह्वान करती है।

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