19 विपक्षी दलों की 20 से 30 सितंबर तक राष्ट्रव्यापी विरोध का आह्वान

विचार—विमर्श

19 विपक्षी दलों के नेताओं की एक मीटिंग 20 अगस्त, 2021 को जूम पर हुई। बैठक की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा ने पार्टी की ओर से इसमें भाग लिया।

कांग्रेस और भाकपा के अलावा, बैठक में भाग लेने वाले अन्यों में तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, शिवसेना, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ;माद्ध, नेशनल कान्फ्रेंस, राष्ट्रीय जनता दल, आॅल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, विदुथलाई चिरुथैगल काची, लोकतांत्रिक जनता दल, जनता दल ;सेक्युलरद्ध, राष्ट्रीय लोक दल, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, केरल कांग्रेस ;मणिद्ध, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग शामिल थीं।

बैठक के अंत में पारित किये गए संयुक्त वक्तव्य का पाठ निम्नलिखित है, जिसमें मुद्दों और मांगों पर प्रकाश डाला गया है और 20 से 30 सितंबर, 2021 तक देशव्यापी विरोध का आह्वान किया गया है।

हम जिस तरह से केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ दल ने संसद के मानसून सत्र को बाधित किया और अनधिकृत सर्विलांस करने के लिए पेगासस सैन्य स्पाइवेयर के अवैध उपयोग पर चर्चा करने या जवाब देने से इनकार किया, तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने, कोविड-19 महामारी पर घोर कुप्रबंधन, आसमान छूती मुद्रास्फीति और मूल्य वृ(ि के साथ-साथ बढ़ती बेरोजगारी पर र्चाा से इंकार किया उसकी हम कडी निन्दा करते हैं। इन सभी और देश और लोगों को प्रभावित करने वाले कई अन्य मुद्दों को सत्ताधारी सरकार द्वारा जानबूझकर नजरअंदाज किया गया।

संसद में अभूतपूर्व दृश्य देखे गए जहां विपक्षी विरोध को बाधित करने के लिए तैनात मार्शलों द्वारा महिला सांसदों सहित अन्य सांसदों को घायल किया गया। विपक्ष को देश और लोगों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के उनके अधिकार से वंचित करने के अलावा, सरकार ने संसद के दोनों सदनों को संभालने में हुए व्यवधान के शोर के माध्यम से कानूनों को पास करा दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में, लोगों की दुर्दशा से संबंधित एक भी मुद्दे पर ध्यान केंद्रित नहीं किया। भाषण बयानबाजी, खाली नारों और दुष्प्रचार से लबालब था। दरअसल, यह 2019 और 2020 में दिए गए पहले के भाषणों की रीपैकेजिंग थी। यह भाषण एक अशुभ चेतावनी है कि हमारे लोगों का जीवन आगे भी बर्बाद होता रहेगा।

कोविड -19 महामारी से निपटने में बड़े पैमाने पर कुप्रबंधन के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों, विशेषकर उन परिवारों को गंभीर पीड़ा हुई है जिन्होंने अपने प्रिय सदस्यों को खो दिया है। दोनों, संक्रमणों की संख्या और मौतों की अंडर रिर्पोटिंग की गयी और अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय द्वारा नोट किये गये आंकडों से अनुमान लगता हैं कि वास्तविक आंकड़े आधिकारिक तौर पर बताए जा रहे से कम से कम पांच गुना अधिक हैं।

एक विनाशकारी तीसरी लहर को रोकने के लिए, यह जरूरी है कि टीकाकरण की दर तेजी से बढ़े। वर्तमान में, हमारी वयस्क आबादी के केवल 11.3 प्रतिशत को दोनों खुराकें मिली हैं और 40 प्रतिशत ;इस 11.3 प्रतिशत सहितद्ध को एक ही खुराक मिली है। इस दर से इस साल के अंत तक पूरी वयस्क आबादी को टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना असंभव होगा।

टीकाकरण की धीमी गति का मुख्य कारण टीकों की कमी है। सरकार ने एक ही दिन में संसद को टीकों की उपलब्धता के तीन अलग-अलग आंकड़े बताए।

भारतीय अर्थव्यवस्था का विनाश, गहरी मंदी के साथ, हमारे करोड़ों लोगों को बेरोजगारी की ओर धकेल रहा है, गरीबी और भूख के स्तर को बढ़ा रहा है। मुद्रास्फीति की दौड और महंगाई से लोगों की परेशानी बढ़ रही है और रोजी-रोटी बर्बाद हो रही है।

हमारे किसानों का ऐतिहासिक संघर्ष अब नौवें महीने में भी जारी है, सरकार तीन किसान विरोधी कानूनों को निरस्त नहीं करने और किसानों को अनिवार्य रूप से एमएसपी की गारंटी नहीं देने पर अडिग है। हम, अधोहस्ताक्षरी, संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों द्वारा शुरू किए गए संघर्ष के प्रति अपना समर्थन दोहराते हैं।

भारत सरकार द्वारा लोगों की निगरानी के लिए पेगासस मिलिट्री स्पाइवेयर की खरीद बेहद खतरनाक है। सरकार एक सीधे सवाल का जवाब देने से इनकार करती है-क्या उसने या उसकी किसी एजेंसी ने साइबर सैन्य निगरानी के लिए जानी जाने वाली इजरायली फर्म एनएसओ से पेगासस स्पाइवेयर खरीदा है? सरकार को जवाब देना चाहिए और सफाई देनी चाहिए। इस तरह की निगरानी न केवल लोगों की निजता के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन है बल्कि भारतीय लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थानों पर हमला है।

निगरानी में रहने वालों की सूची में राजनीतिक नेता, पत्रकार, सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश और न्यायपालिका के अधिकारी, एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक पूर्व सीबीआई प्रमुख, एक पूर्व चुनाव आयुक्त, दो पूर्व मुख्यमंत्री और अन्य शामिल हैं। यह अशुभ है। वैश्विक मीडिया एक्सपोजर से पता चलता है कि संसद के आम चुनाव की पूर्व संध्या पर 2019 में इस तरह की निगरानी बड़े पैमाने पर हुई थी। व्यक्तियों के अलावा, यह उन संस्थानों पर हमला है जो लोकतंत्र में महत्वपूर्ण नियंत्रण और संतुलन के रूप में कार्य करते हैं और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

राष्ट्रीय संपत्ति की लूटः अर्थव्यवस्था का विनाश हमारी राष्ट्रीय संपत्ति की एक बड़ी लूट के साथ हो रहा है, बैंकों और वित्तीय सेवाओं सहित सार्वजनिक क्षेत्र का बड़े पैमाने पर निजीकरणय हमारेऋ खनिज संसाधनों और सार्वजनिक उपयोगिताओं का निजीकरण प्रधानमंत्री के साथियों को लाभान्वित करने के लिए हो रहा है। इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।

दलितों, आदिवासियों और महिलाओं पर हमले तेजी से बढ़े हैं। यह देश में सामाजिक न्याय की ओर बढ़ने की संवैधानिक अनिवार्यता को पूरी तरह से नकारना है।

न तो संसद इनमें से किसी मुद्दे पर चर्चा कर सकी और न ही प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को अपने संबोधन में लोगों की बिगड़ती स्थिति, उनके जीवन और आजीविका को कम करने के लिए कोई समाधान दिया।

इन हालात में हम 19 विपक्षी दलों के नेता केन्द्र सरकार से निम्नलिखित मांग करते हैंः

  • मार्शल और भारत में सभी वैक्सीन उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाना, विश्व स्तर पर टीकों की खरीद करना और मुफ्त सार्वभौमिक सामूहिक टीकाकरण अभियान को तुरंत तेज करना, कोविड के कारण अपनी जान गंवाने वालों के लिए पर्याप्त मुआवजा प्रदान करें, सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का व्यापक विस्तार करे।
  • केंद्र सरकार को आयकर दायरे से बाहर के सभी परिवारों को प्रति माह 7,500 रुपये का मुफ्त नकद हस्तांतरण लागू करना चाहिए। सभी जरूरतमंदों को दैनिक उपभोग की सभी आवश्यक वस्तुओं से वाली मुफ्त भोजन किट वितरित करें।
  • पेट्रोलियम और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में अभूतपूर्व बढ़ोतरी को वापस लें, रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं, विशेष रूप से खाना पकाने के तेल की कीमतों को कम करें और तेजी से बढ़ती मुद्रास्फीति को नियंत्रित करें।
  • तीनों काले कृषि विरोधी कानूनों को रद्द करें और किसानों को एमएसपी की गारंटी आवश्यक करें।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के बेलगाम निजीकरण को रोकें और वापस करें, श्रमिक और श्रमिक वर्ग के अधिकारों को कमजोर करने वाली श्रम संहिताओं को निरस्त करें। मेहनतकश लोगों के विरोध और वेतन में बारगेनिंग के अधिकारों को बहाल करें।
  • एमएसएमई के पुनरु(ार के लिए मौद्रिक प्रोत्साहन पैकेज लागू करें, केवल )ण का प्रावधान नहीं। हमारे आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए सार्वजनिक निवेश बढ़ाएं जिससे रोजगार पैदा हो और घरेलू मांग को बढ़ावा मिले। सरकारी नौकरियों में रिक्त पदों को भरें।
  • कम से कम मजदूरी को दोगुना करने के साथ 200 दिनों को बढाने की गारंटी के साथ मनरेगा का विस्तार करें। इसी तर्ज पर एक शहरी रोजगार गारंटी कार्यक्रम कानून बनायें।
  • शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के टीकाकरण को प्राथमिकता दें ताकि शिक्षण संस्थानों को जल्द से जल्द फिर से खोला जा सके।
    -लोगों की निगरानी के लिए पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग की उच्चतम न्यायालय की निगरानी वाली न्यायिक जांच तत्काल करें। पहले के आर्डर को रद्द करने और अधिक कीमत पर नया आर्डर देने की राफेल सौदे की उच्च स्तरीय जांच करें।
  • सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करें, जिनमें भीमा कोरेगांव मामले में कठोर यूएपीए के तहत और सीएए के विरोध प्रदर्शन में शामिल लोग हैं। लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के लिए राजद्रोह/एनएसए जैसे अन्य कठोर कानूनों का उपयोग करना बंद करें। अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए हिरासत में लिए गए सभी मीडियाकर्मियों को रिहा करें।

जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करें। जम्मू-कश्मीर के सेवा कैडर सहित पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करें।
पार्टियां संयुक्त रूप से 20 से 30 सितंबर 2021 तक पूरे देश में विरोध कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। इन सार्वजनिक विरोध कार्यक्रमों के रूपों का निर्णय हमारी पार्टियों की संबंधित राज्य इकाइयों द्वारा राज्य में मौजूद कोविड नियमों और प्रोटोकाॅल की ठोस शर्तों के आधार पर किया जाएगा। विरोध के इन रूपों में, दूसरों के साथ, धरना, विरोध प्रदर्शन, हड़ताल आदि शामिल हो सकते हैं।

हम, 19 विपक्षी दलों के नेता, भारत के लोगों से आह्वान करते हैं कि वे अपनी धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य व्यवस्था की पूरी ताकत से रक्षा करने के लिए इस अवसर पर उठ खड़े हों। भारत को आज बचाइए, ताकि हम इसे बेहतर कल के लिए बदल सकें।

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने एक पत्र लिखा और बैठक में शामिल होने में असमर्थता व्यक्त की क्योंकि वह राज्य के अंदरूनी हिस्सों में थे। हालांकि यह बयान उन्हें भी भेजा गया था।

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