व्यापक सरोकारों वाले थे डाॅ. ए के सेन

विचार—विमर्श

पटनाः प्रख्यात चिकित्सक और समाजसेवी और अनेक संगठनों के प्रेरक, संस्थापक डाॅ. ए. के. सेन को उनकी 34वीं पुण्यतिथि पर शहर भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, चिकित्सकों ने याद किया। वक्ताओं ने एक डाॅक्टर और समाजसेवी के रूप में उनकी भूमिका पर चर्चा की। डाॅ. सेन का व्यक्तित्व विराट और बहुआयामी था। वह जन सरोकार वाले डाॅक्टर थे। गरीबों और कमजोरों का इलाज मुफ्त तो करते ही थे उनके हक अधिकार के लिए लड़ते भी थे। उक्त बातें इस आयोजन में आये वक्ताओं ने कही।

स्मृति आयोजन के विमर्श का विषय प्रवेश एवं आगंतुकों का स्वागत करते हुए डाॅ. शकील ने कहा कि डाॅ. सेन केवल बिमारी को ही खत्म नहीं करना चाहते थे बल्कि बिमारी के कारणों को खत्म करने के लिए संकल्पित थे और सामाजिक व्यवस्था में बदलाव को प्रतिबद्ध थे। उनके सोच एवं सपनों पर अमल नहीं करने से ही अपना समाज बिमारी एवं फूट का शिकार हो गया है।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डाॅ. सत्यजीत ने कहा कि डाॅ. सेन सामाजिक सरोकारों वाले डाॅक्टर थे। डाॅ. सेन की प्रतिष्ठा समाज के सभी वर्गों में थी। सेन का व्यक्तित्व बहुत बड़ा था। सभी तरह के संघर्षों में आगे रहने वाले लोग थे। सीपीआई राज्यसचिवमंडल सदस्य जानकी पासवान ने बताया कि डाॅ. सेन आजीवन कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे। डाॅक्टर होते हुए भी सभी तरह के आंदोलनों से उनका जुड़ाव रहता था। उन्होंने अनेक संगठनों को बनाया जिससे वे केवल कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता ही नहीं बल्कि जन नेता थे।

केदारदास श्रम एवं समाज अध्ययन संस्थान के महासचिव नवीनचंद्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि डाॅ. सेन हर जगह काम करने को तैयार रहते थे। बिना महामारी और बीमारी के पूंजीवाद नहीं चलता है। गैर चिकित्सीय कामों में समय बर्बाद करने के प्रश्न पर डाॅ. सेन कहा करते थे कि “गरीबी और बीमारी न बढ़े यह जिम्मेदारी भी तो डाॅक्टरों की है।” डाॅ. सेन कभी संघर्ष से भागे नहीं।

बिहार महिला समाज की अध्यक्ष सुशीला सहाय ने अपने संबोधन में कहा कि डाॅ. सेन व्यक्ति से ज्यादा संगठन थे। कई सारे संगठनों को खड़ा किया। डाॅ. सेन कभी गुस्सा नही होते थे। डाॅ. सेन में कितनी खूबियां थी आप जान नहीं सकते। वो कई लोगों के लिए भगवान की तरह थे। सीपीएम के वरिष्ठ नेता अरुण मिश्रा ने भी सभा को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि आज जब पैसा ही सबकुछ हो गया ऐसे समय मे डाॅ. सेन के मूल्यों को याद करने की जरूरत है। डाॅ. सेन किसानों के आंदोलन में भी लाल झंडा लेकर चलते थे। गरीबी, दोहन, शोषण के खिलाफ लड़ने वाले थे डाॅ. सेन। वेंकटेश कुमार ने कहा कि हमारे संगठन बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ का निर्माण भी उन्होंने ही किया। जिसकी वजह से आज हम एक मजबूत स्थिति में हैं। आज जो समाज की हालत है उसे ठीक करने के लिए डाॅ. सेन के रास्ते चलना होगा।

डाॅ. श्रीराम ने बताया कि डाॅ. सेन ने छात्रों किसानों मजदूरों के लिए काम करने वाले कई संगठनों को आगे बढ़ाया। पीएमसीएच में भी पार्टी के ब्रांच की स्थापना की।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. सहजानंद प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि डाॅ. सेन हमेशा चिकित्सकों को समाज से जुड़ने के लिए प्रेरित करते थे। डाॅ. रंजीत ने कहा कि ड‚ सेन का व्यक्तित्व बहुत ऊंचा था। उनका जाना इतिहास से बड़ी चीज का खत्म होना है। उन्होंने कई संगठनों का निर्माण किया। उनका लोगों से पारिवार जैसा रिश्ता होता था। डाॅ. पी एन पी पाल ने बताया कि मैं डाॅक्टर बनने के पहले से डाॅ. सेन का नाम सुन चुका था। दूर-दूर के इलाके में भी लोग उनकी चर्चा करते थे।

प्रसि( चिकित्सक एच एन दिवाकर ने सेन को याद करते हुए बताया कि डाॅ. सेन पाॅलीक्लीनिक के माध्यम से गरीबों और अभावग्रस्त लोगों का इलाज फ्री में करते थे। उन्होंने पाॅलीक्लिनिक से शहर के कई बड़े डाॅक्टरों को जोड़ा। आज जरूरत है कि उस सिलसिले को बढ़ाया जाए।
सेन के लंबे समय तक सहयोगी रहे मन्नान साहब ने कहा कि हमने 28 साल तक उनके साथ काम किया।

सेन साहब ने ही मुझे सबकुछ सिखाया। मेडिकल एडुकेशन के लिए बनी कमेटी में सेन साहब थे उन्होंने सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिया। डाॅ. सेन ने ईमानदारी से मेडिकल पेशे को निभाया। अराजपत्रित प्रारंभिक शिक्षक संघ के महासचिव भोला पासवान ने कहा कि डाॅ. सेन का पूरा व्यक्तित्व प्रेरणास्रोत था। बहुत ही सरल और सहज व्यक्ति थे। शिक्षाविद अनिल कुमार राॅय ने अपने संबोधन में कहा कि आदमी तभी लोकप्रिय होता जब वह समाज की आवश्यकता को सम्बोधित करता है। सेन उन्हीं लोगों में से थे।

वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता मोहन प्रसाद ने बताया कि 1967 में सेन साहब ने मुझे कम्युनिस्ट पार्टी से जोड़ा। बहुत दबाव के बाद भी उन्होंने फीस नहीं बढ़ायी। वह मुफ्त दावा भी बांटते थे। डाॅ. सेन ने झोपड़ी में रहने वालों का संगठन झोपड़ी निवासी संघ बनाया। जो इनलोगों के स्थायी निवास के लिए लड़ता था।

सभा का संचालन डाॅ. शकील और विश्वजीत कुमार ने संयुक्त रूप से किया।

सभा मे बड़ी संख्या में डाक्टर, बुद्धिजीवी व आम लोग मौजूद थे। जिसमे भाकपा नेता विजय नारायण मिश्र, चक्रधर प्रसाद सिंह, इसक्फ के राज्य महासचिव रविन्द्र नाथ राय, डी पी यादव, सिटीजन फोरम के संयोजक अनीश अंकुर, सुमंत शरण, रामलला सिंह, अजीता सेन, प्रो. अशोक कुमार यादव, डाॅ. अनिल कुमार सिंह, डाॅ. अजय कुमार, मो. कैसर, विनोद कुमार, त्रिपुरारी सिंह, सैलेंद्र कुमार, दीपक कुमार, मनोज महतो, राजकुमार शाही, नरेंद्र कुमार, विपल्व, नितिन, ड‚ अंकित, राकेश कुमुद, अजय कुमार, सुनील सिंह, अशोक कुमार सिन्हा, कौशलेन्द्र कुमार वर्मा, जितेंद्र कुमार, अक्षय कुमार, रोहित कुमार आदि।

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