बैतूल में मना भाकपा का स्थापना दिवस

बैतूलः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का 95 वां स्थापना दिवस का कार्यक्रम पाथाखेड़ा न्यू मार्केट एटक कार्यालय, जिला-बैतूल (म.प्र.) में 26 दिसंबर 2020 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में तुलसी चंदेलकर एवं सुरेश उबनारे की टीम द्वारा देशभक्ति और लोक गीत के माध्यम से आगंतुकों का स्वागत किया गया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस के इस कार्यक्रम में कोल इंडिया के एटक के जेबीसीसीआई सदस्य ;वै.द्ध एवं मध्यप्रदेश राज्य एटक के अध्यक्ष, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्यप्रदेश राज्य के सहायक सचिव हरिद्वार सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्यप्रदेश राज्य सचिव अरविंद श्रीवास्तव, कोल इंडिया सेफ्टी बोर्ड मेंबर सी.जे जोसेफ, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कृष्णा मोदी, महाराष्ट्र एटक के महामंत्री टी. एन. मस्की, वेलफेयर बोर्ड मेंबर रमकेरा यादव, वेकोलि टीएमसी सदस्य श्रीनाथ सिंह, पाथाखेड़ा क्षेत्र के महाप्रबंधक पीके चैधरी, पेंच कन्हान क्षेत्र के अध्यक्ष दयाशंकर सिंह, कार्यक्रम के अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

कार्यक्रम को राज्य सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए कहा कि 26 दिसंबर 1925 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जन्म हुआ था इस प्रकार आज सीपीआई का 95वां स्थापना दिवस है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संघर्षों का इतिहास बहुत पुराना है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मेहनतकशों व मजदूरों की पार्टी है।


कोल इंडिया के एटक के जेबीसीसीआई सदस्य ;वै.द्ध एवं मध्यप्रदेश राज्य एटक के अध्यक्ष, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मध्यप्रदेश राज्य के सहायक सचिव हरिद्वार सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि केंद्र में बैठी भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसान और श्रमिक विरोधी सरकार है। इस सरकार को यदि केंद्र से नहीं फेंका गया तो सन 1947 की स्थिति भारत में निर्मित हो जाएगी।

किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि किसान कभी बाढ़, तो कभी सूखा आदि विभिन्न कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए फसल पैदा करते हैं और देश को अन्न देते हैं। ऐसे में देश की सरकार का यह दायित्व है कि वह किसान के हितों की रक्षा करें, किसानों को उनके फसल का उचित मूल्य मिले। लेकिन वर्तमान की यह सरकार पूर्ण रूप से किसान विरोधी है, यह साबित हो चुका है। यह सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर कार्य कर रही है।

किसानों का यह आंदोलन भारत के इतिहास में किसान विरोधी हुकूमत के विरु( सबसे बड़ा आंदोलन साबित होगा। किसान बिल के विरोध में देश के किसान पिछले 26 दिनों से लगातार अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन केंद्र में बैठी भाजपा की सरकार गूंगी बहरी होने का निर्वाह कर रही है। उन्होंने कहा कि देश के पब्लिक सेक्टर को बेचने का काम यह सरकार कर रही है। कोल इंडिया के खदानों को कमर्शियल किया जा रहा है, 44 श्रमिक कानून थे जिसे 4 कोड में बदलकर श्रमिकों की कमर तोड़ने का काम केंद्र सरकार ने किया। श्रमिको के कई अधिकार खत्म कर दिए गए है।

औद्योगिक संबंध नियम विधेयक 2020 में सरकार ने श्रमिकों के हड़ताल करने के अधिकारों को सीमित कर दिया है। साथ ही कंपनियों को भर्ती और छंटनी को लेकर ज्यादा अधिकार दिए हैं। श्रम कानून के मुताबिक 100 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को बंद करने से पहले सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है लेकिन इस नए विधेयक में सीमा बढ़ाकर 300 कर्मचारी कर दी गई है इसका अर्थ यह हुआ कि अब जिन कंपनियों में 300 से कम कर्मचारी हैं उस कम्पनी को बंद करने अथवा कर्मचारियों की छटनी करने के लिए श्रम विभाग की इजाजत लेने की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा बड़ी कंपनियों को मिलेगा।

उनके लिए कर्मचारियों की छंटनी करने के अलावा कंपनी बंद करना भी आसान होगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकारों को अपनी जरूरत के मुताबिक इस संख्या को बढ़ाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इस प्रावधान के तहत अब कंपनियां कर्मचारियों के लिए मनमाने ढंग से सेवा शर्तों को पेश करने में सक्षम हो जाएँगी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के स्थापना दिवस के इस कार्यक्रम में कोल कर्मी आशा, उषा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहित आमजन शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीपीआई के जिला सचिव रामा वाईकर, पाथाखेड़ा एरिया के अध्यक्ष लक्ष्मण झरबड़े, महामंत्री श्रीकांत चैधरी, जेसीसी सदस्य हबीब अंसारी, कोषाध्यक्ष इन देश कुमार ठाकुर, वेलफेयर मेंबर राकेश वाईकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के मुख्य रूप से अशोक सेन गुप्ता, टीएससी मेंबर ओबीएन रेड्डी, दीपक तुरिया, सुखदेव सूर्यवंशी, अशोक चैहान, सुखराम मोहने, फिरोज खान, गोविंद पवार, सेवाराम मालवीय, पी सी शुक्ला, राकेश चक्रवर्ती, हेमंत चंद्राने, रामचरण गंडेकर, प्रदीप रोजिंदार, शंकर ठाकुर, राम नारायण यादव, रवि मंडलेकर, मोहित यादव, साजिद, सरिता सोनी, रीता बारंगे, मालती वर्मा, विमला उइके, संध्या राजुरकर सहित बड़ी संख्या में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं एटक यूनियन के पदाधिकारी उपस्थित थे।

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